
मंडी। मंडी जिला परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के खिलाफ लाया कांग्रेसी सदस्यों का अविश्वास प्रस्ताव शनिवार को औंधे मुंह गिर गया है। इससे कांग्रेस के जिला परिषद पर कब्जा करने के सपने धरे के धरे रह गए। गलत रणनीति के चलते कांग्रेस अब अगले दो वर्षों तक अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज नहीं हो पाएगी। जिला परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष पद पर फिलहाल भाजपा का कब्जा बरकरार रहेगा। कांग्रेस के जिप सदस्यों ने सत्ता के मद में आकर 36 सदस्यों वाली मंडी जिला परिषद पर अपना कब्जा जमाने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन इसके लिए जिले के तीनों मंत्रियों और विधायकों को विश्वास में नहीं लिया गया था। इसके चलते कांग्रेसी खेमा अविश्वास प्रस्ताव के लिए पर्याप्त कोरम पूरा नहीं कर पाया। इस कारण शनिवार को जिलाधीश कार्यालय के सम्मेलन कक्ष में चुनाव पीठासीन अधिकारी देवेश कुमार एवं जिला पंचायत अधिकारी रमन कुमार अविश्वास प्रस्ताव पर बुलाए गए हाउस में सदस्यों का इंतजार करते रह गए, लेकिन कोई भी सदस्य हाल में उपस्थित नहीं हुआ। प्रशासन की ओर से चुनाव करवाने के लिए गुप्त मतदान की भी पूरी व्यवस्था कर रखी थी। इधर, इस राजनीतिक ड्रामे के लिए पूरा दिन कांग्रेस के गांधी भवन में सत्तापक्ष के सदस्यों का एक धड़ा कोरम के लिए जिला परिषद सदस्यों का समर्थन जुटाने के लिए हाथ पैर मारता रहा, लेकिन कोरम के लिए 19 सदस्य कांग्रेसी खेमा नहीं एकत्र कर पाया। इस कारण पांच बजे तक इंतजार में बैठे रहे चुनाव अधिकारियों ने प्रक्रिया समाप्त कर दी। वर्तमान में जिप अध्यक्ष पद पर द्रंग से भाजपा के खीरामणी हैं और उपाध्यक्ष पद पर सरोज धूमल काबिज हैं। उन्हें 36 में से 22 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है। कांग्रेस के पास 11 सदस्य अपने हैं और 2 सदस्य वामपंथी संगठनों के हैं, जिन्होंने अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के लिए मत नहीं डाले थे। इधर, कांग्रेसी सदस्यों ने कुछ दिन पूर्व जिलाधीश को अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए 19 सदस्यों के हस्ताक्षरों के साथ पत्र लिखा था। इसी आधार पर जिलाधीश ने शनिवार को हाउस बुलाया था और इस बैठक में कोई भी सदस्य उपस्थित न होने पर उसे दो वर्ष के लिए स्थगित कर दिया गया।
